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  • 07
  • July

नक्षत्र के मँत्र और देवता

नक्षत्र के मँत्र और देवता

सभीनक्षत्र मंत्र : वैदिक , पौराणिक और नक्षत्र देवता मंत्र

मित्रों हमारे जीवन में नक्षत्रों का भी उतना ही महत्त्व है जितना की नवग्रहों का, ऋषि मुनियों ने नभ मंडल को कल  २७ नक्षत्र में बांटा हैं और प्रतीक राशि के अंतर्गत ३ नक्षत्र आते हैं।

पीड़ा परेशानी होने पर हम ग्रहों की पूजा, दान  और जप तो करते हैं पर नक्षत्रों को भूल जाते हैं। यहाँ आपको नक्षत्रों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवा रहा हूँ जिसमे उनके वैदिक, पौराणिक मंत्र, नक्षत्र देवता के मंत्र और नक्षत्र मंत्र हैं।  अपने नक्षत्र मंत्र के जप करके आप लाभ उठा सकते है उसे बलवान कर सकते हैं साथ ही नक्षत्र की वनस्पति के वृक्ष को लगाकर उसकी सेवा करके यानि नित्य जल देते हुए मंत्र जप कर लाभ ले सकते हैं और यदि किसी कारण से नक्षत्र लाभ न दे रहा हो तो उसे अपने पक्ष में लाभ देने वाला बना सकते हैं।  आपका जन्म नक्षत्र कैसा है और आपके जीवन पर क्या प्रभाव दे रहा है इसके लिए आप हमारा सम्पर्क कर इस जानकारी का लाभ ले सकते हैं।

१) अश्विनी

नक्षत्र: अश्विनी
नक्षत्र देवता : अश्विनीकुमार
नक्षत्र स्वामी : केतु
नक्षत्र आराध्य वृक्ष : कुचला
राशी व्याप्ती : ४ हि चरण मेष राशीमध्ये
नक्षत्र प्राणी: घोडा
नक्षत्र तत्व : वायु
नक्षत्र स्वभाव : शुभ

नक्षत्र देवता मंत्र: 


अ)ॐअश्विनी कुमाराभ्यां नमः
आ) ॐ अश्विभ्यां नमः

वेद मंत्र

ॐ अश्विनौ तेजसाचक्षु: प्राणेन सरस्वती वीर्य्यम वाचेन्द्रो
बलेनेन्द्राय दधुरिन्द्रियम । ॐ अश्विनी कुमाराभ्यो नम: ।

पौराणिक मंत्र:

अश्विनी देवते श्वेतवर्णो तौव्दिभुजौ स्तुमः l
सुधासंपुर्ण कलश कराब्जावश्च वाहनौ ll

विहित कार्यों को बतलाते हुए ऋृषि कहते हैं कि वस्त्रधारण, उपनयन, क्षौरकर्म, सीमन्त, आभूषण क्रिया, स्थापनादिकर्म, अश्वादि वाहनकर्म, कृषि, विद्या कर्म आदि अश्विनी नक्षत्र में करना शुभद होता है। यह तो स्पष्ट ही है कि अश्विनी नक्षत्र के स्वामी अश्वनीकुमार हैं नाड़ी- आदि, गण-देवता, राशि स्वामी-मंगल, योनि-अश्व, वश्य-चतुष्पद, वर्ण-क्षत्रिय, राशि-मेष तथा अक्षर हैं चू चे चो ला। इस तरह यह सर्वसुखकारक. तारक कारक नक्षत्र है।

कूर्मचक्र के आधार पर अश्विनी नक्षत्र इशान दिशा को सूचित करता है। इशान कोण से होन वाली घटनाओं या कारणों के लिए किसी भी स्थान में अश्विनी नक्षत्र ग्रहाचार जबाबदार हो सकता है। देश प्रदेश का फलादेश करते समय इशान कोण के प्रदेशों के बारे में अश्विनी नक्षत्र के द्वारा विचार किया जा सकता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार अश्विनी कुमार के पिता सूर्य एवं माता शंग द्वारा दो भाइयों की जोड़ी अश्विनी कुमार को जन्म दिया था। इस परिकथा के अनुसार अश्विनी कुमार स्वर्ग से तीन पहिये वाले घोड़ों से सुते रथ द्वारा स्वर्गारोहण कर रहे हैं। ऐसा सूचित किया गया है जिसके द्वारा हम इस नक्षत्र में जन्मे जातक वौद्धिक रूप से सुदृढ़, विकाशशील निरन्तर प्रगति करने वाले शक्तिशाली एवं भ्रमणशील होने की सम्भावना रहती है। इस नक्षत्र के जातक मिलिटरी, पुलिस, संरक्षण से सम्बन्धित कार्यभार एवं अन्य व्यवस्थाओं मे ज्ञान और बुद्धि के साथ व्यवसायों में विशेष रूचि देखी जाती है।

अश्विनी नक्षत्र से अश्व द्वारा सवारी, वाहन के रूप में विचार कर सकते है। इस कारण नक्षत्र में वाहन तथा ट्रांसपोर्ट के व्यवसाय के साथ जोड़ा जाता है। अश्विनी नक्षत्र के मानव जीवन पर निम्न प्रभाव पड़ते है- तन्दुरूस्त शरीर, लाल आंखे, आगे निकले हुए दांत एवं चेहरे पर किसी भी प्रकार के निशान दिखायी देते हैं। अश्विनी नक्षत्र के जातक इष्र्याखोर, शौकीन, निर्मय और स्त्रियों में आसक्त होता है।

अश्विनी नक्षत्र में सिर में दर्द, आंख, चमड़ी के दर्द से पीड़ा रहती है एवं सवारी, घुड़सवारी से सम्बन्धित व्यवसाय, ट्रान्सपोर्टेशन, मशीनरी के रूप में कार्य करते हैं। इस नक्षत्र में जन्मी स्त्रियां सुन्दर, धनधान्ययुक्त श्रृंगार में रूचि, मृदुभाषी सहनशील, मनोहर, बुद्धिशाली तथा बड़ों गुरू, माता-पिता और देवी-देवताओं में आस्था रखनेवाली होती है। अश्विनी नक्षत्र जब शुभ ग्रहों से युत या संबन्धित हो तो जातक को शुमत्व प्रदोन करती है इसके विपरीत अशुभ तत्व और तद्संबंधी रोग, बिडम्बना या मुश्किलों का अनुभव कराती है। ऐसे में अधिकतर मस्तक की चोट, मज्जातुंत की बिमारी तथा दिमाग को हानि पहुँचने वाले रोगों में चेचक, मलेरिया तथा कभी-कभी लकवे के योग बनते पाये गये हैं अश्विनी नक्षत्र के जातक सर्वसामान्य एवं रूचिकर होते हैं। इस नक्षत्र का स्वमी ग्रह मंगल है योग, विष्कुभं, जाति-पुरुष, स्वाभाव-शुभ, वर्ण वैश्य तथा विंशोत्तरी दशा अधिपति ग्रह केतु है।

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